(N/A) $(1)$ $C_4$ पथ में बंडल शीथ कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट में $CO_2$ की सांद्रता लगातार बढ़ती रहती है। इन कोशिकाओं में कार्बन स्थिरीकरण की जैव-संश्लेषणात्मक प्रक्रिया होती है,इसलिए अधिक $CO_2$ प्राप्त होता है और अधिक कार्बोहाइड्रेट का उत्पादन होता है।
इसके अलावा,क्रान्ज़ (Kranz) ऊतक की संरचना मेसोफिल कोशिकाओं की प्रकाश अभिक्रिया में उत्पन्न $O_2$ को बंडल शीथ कोशिकाओं तक पहुँचने से रोकती है। अतः प्रकाश-श्वसन (photorespiration) की कोई संभावना नहीं होती है। इस प्रकार,$C_4$ पथ की उत्पादकता $C_3$ पथ से अधिक होती है।
$(2)$ प्रकाश अभिक्रिया के अंत में उत्पन्न $ATP$ और $NADPH$ का उपयोग जैव-संश्लेषणात्मक चरण में किया जाता है। $CO_2$ अणु $RuBP$ के साथ मिलकर $PGA$ बनाता है। यदि यह चक्र छह बार चलता है,तो $6$ अणु $RuBP$,$6$ अणु $CO_2$ के साथ मिलकर रिडक्शन के दौरान $12$ अणु $PGAL$ बनाते हैं। इनमें से दो अणु $PGAL$ का उपयोग ग्लूकोज के एक अणु को बनाने में किया जाता है और शेष $10$ अणु $PGAL$ पुनरुद्भवन (regeneration) द्वारा पुनः $6$ अणु $RuBP$ बनाते हैं। इस प्रकार,चक्र चलता रहता है,जिसके दौरान वायुमंडल से $CO_2$ प्राप्त होता है और अंत में ग्लूकोज का निर्माण होता है।